कोई जचदी ना थान………..यह रबाबी प्रेम गाथा है

  • कोई जचदी ना थान………..यह रबाबी प्रेम गाथा है

    Tuesday, August 1st, 2017

कोई जचदी ना थान...........यह रबाबी प्रेम गाथा है जिसको हाल ही में रचने का काम किया है दलेर मेंहदी ने। यह गाना है उन मुरीदों के लिए जिनमें प्यार है, समर्पण है, जज्बा है और जो बेचैन हैं कुछ कर दिखाने के लिए।

चाहने वालों की दुनिया भी बड़ी अजीब होती है जिसमें उनका अपना संसार इतना विस्तृत और व्यापक होता है जिसमें वे डूबे रहना चाहते हैं। उस दुनिया के बाहर क्या हो रहा है, उससे उनको कोई लेना-देना नहीं है। दूसरी ओर बाहर की दुनिया इस प्रेम के, इस समर्पण के, इस दीवानगी के मायने ही समझना नहीं चाहती। ऐसे में चाहने वाले दुनिया को और दुनिया चाहने वालों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहती है। इसी रस्साकशी को, इसी कश्मकश को यह गाना व्यक्त करता है। दलेर के इस गाने की खासियत यह है कि इसे संगीत की क्लैसिकी या शास्त्रीयता के आग्रहों के साथ संगीतबद्ध किया गया है जिसमें राग मालगुंजी की महक महसूस होगी जो मानसून के आने की व्याकुलता को बढ़ायेगी और उस चाहत को छेड़ेगी जिसको आप मन में रखते हैं, यादों में रखते हैं, याद करते हैं।

इन गाने का संयोजन बबलू कुमार ने किया है। बबलू यानी दंगल, दिलवाले और बोलो ता रा रा से जाने जाने वाले। तबले पर हैं उस्ताद रामजू बच्चन जिनकी ख्याति भारतीय सिनेमा के अकेले ढोल बजाने वाले उस्ताद की मानी जाती है। आकाश जेटली ने इसे बहुत ही काबिलियत और कारीगरी के साथ मिक्स किया है जिसके साथ जाना जाता है डीएम फोक स्टुडियो जो चर्चित है अपने लाजवाब शो से जिसके सूत्रधार दलेर रहे हैं और जिसमें गजल के सम्राटों उस्ताद अहमद हुसैन, मोहम्मद हुसैन और पाकिस्तानी लोकप्रिय कलाकार इम्तियाज अली और हुसैन बख्श गुल्लू।

दलेर मेंहदी की लम्बी म्युजिकल जर्नी पर जाइये तो गाथा केन्द्रित कितने ही अलबम मुरीदों को याद आ जायेंगे। ऐसे अलबमों में जेहरे दिल नू प्यारे, किते सुन वे माहिया, ढोल माहिया, सजना साथों दूर ना जाविन और रूबरू गाना मकबूल का, कजरारे फिल्म चुपके से का, दोहा जो कि प्यार में डूबे कुँवारों के दिल की बात कहता है, और ये आवाज बनकर आते हैं दलेर मेंहदी, है न कमाल की बात।

यह प्रेमगाथा, कोई जचदी ना थान, लम्बे समय बाद दलेन पाजी के उसी अन्दाज की याद दिला देगी कि आपका प्रेमी भीतर से मचल उठेगा, जाग जायेगा।