दलेर, सुरों का वह शेर है जिसकी गर्जना चारों ओर है

  • दलेर, सुरों का वह शेर है जिसकी गर्जना चारों ओर है

    Tuesday, August 1st, 2017

दलेर मेंहदी अपने चाहने वालों का मनोरंजन करते रहने वाले शख्सु हैं, बिना ठहरे। मिर्जिया की भारी सफलता के बाद, जिसमें उनके गाये गाने आत्माे का स्व्र मालूम पड़ते हैं, दो हजार करोड़ लोगों के लिए नजीर बन गयी फिल्मय दंगल और उसके बाद चार भाषाओं में बनी फिल्म‍ बाहुबली भी इस बात का प्रमाण हैं कि दलेर, सुरों का वह शेर है जिसकी गर्जना चारों ओर है।

दलेर का अगला सुपरहिट सदाबहार गाना, कुडि़याँ शहर दीयाँ जो कि राहुल रवैल की 1999 में आयी एक्श न से भरपूर फिल्मा अर्जुन पण्डित का सुपरहिट था,श्रेयस तलपड़े की चर्चित फिल्म1 पोस्ट र बॉयज का एक अहम आकर्षण बन गया है। इस फिल्मट में सनी देओल, बॉबी देओल, श्रेयस खुद और एली अवराम की प्रमुख भूमिकाएँ हैं।

यह गाना मूल रूप से दलेर ने लिखा और कम्पोओज किया था जो नागपुर के कोका कोला टूर की याद दिलाता है। दर्शकों को याद होगा कि जूही चावला इस गाने का खास आकर्षण थीं। कुडि़याँ शहर दीयाँ का नया रंग और पूरा गाना तनिश्कं बागची की मेहनत का नतीजा है जिन्हों ने बद्रीनाथ की दुल्हरनियाँ के लिए तम्माा तम्माए तथा ओके जानू का हम्माक हम्माक और मस्तह मस्तस, मशीन के लिए तैयार किया जो सुपरहिट रहा। नेहा कक्क‍ड़ ने इस बार इस गाने में दलेर का साथ दिया है और दिलचस्प चुलबुले गणेश आचार्य की कोरियोग्राफी है।

श्रेयस जो कि पोस्टैर बॉयज के निर्माता हैं, चहककर बताते हैं कि हम चाहते थे कि इस फिल्मह के लिए एक ऐसा झन्नासटेदार और ऊर्जा से भरा ट्रेक तैयार करें तो फिल्म की पहचान बन जाये। तब किसी ने सुझाव दिया कि कुडि़याँ शहर दीयाँ को चुनना चाहिए क्योंेकि वह सनी पाजी की सुपरहिट फिल्मे का गाना है जो इस फिल्मन में उसी याद को एकदम से ताजा कर देगा और यह जादू, यह चमत्का र दलेर पाजी के सिवा और कौन कर सकता है, इसे फिर से नये जमाने के अनुसार शब्दों में, बोलों में फिर से रचकर।

सन्दजर्भ :

यह बात 1999 की है। उस समय कोका कोला टूर दलेर दा, खूब धूम मचा रहा था। निर्माता एन आर पचीसिया और निर्देशक राहुल रवैल ने इस शो का धमाल जानकर अपनी आने वाली फिल्म अर्जुन पण्डित के लिए दलेर मेंहदी को इस सुपरहिट नम्बरर के साथ जोड़ना चाहा। इधर सुपरहिट सफलता के साथ ही दलेर पाजी हर दूसरे दिन औसतन यानी दो माह में तीस कन्स र्ट करके फतह फहरा रहे थे। पचीसिया और रवैल ने दलेर पाजी को नागपुर टूर में जाकर हासिल किया और कहा कि हमें एक दलेर मेंहदी यूएसपी वाला धमाकेदार गाना चाहिए। दलेर पाजी ने भी पचास हजार चाहने वालों के बीच ओये होये के कुडि़याँ शहर दीयाँ गाकर धमाल कर दिया। इस गाने की तेजी, प्रभाव, शोर और मस्तीँ ऐसी थी कि हर एक को अपनी सुधबुध खोने पर मजबूर कर देती थी। जवानों में जोश भर दे ऐसा गाना अर्जुन पण्डित की शान बना जिसे अपने चाहने वालों को दलेर पाजी ने भेंट किया था।

दलेर मेंहदी ने जिस तत्पुरता और तत्कािल अपनी प्रतिभा का परिचय देकर एक सुपरहिट गाना तैयार कर दिया वह राहुल रवैल के लिए भी चकित कर देने वाला था। उन्होंअने इस गाने का दर्शकों में अपने सामने वह प्रभाव देखा जिसने पहले ही यह साबित कर दिया कि गाना कमाल का है। बाद में यह दलेर के अनेक शो का हिस्साु बना।

तुनक तुनक जैसे चाहने वालों को झुमाने वाले गाने के रचयिता दलेर किंग ऑफ भांगड़ा, मस्तीा के मसीहा, झूलों के सरदार और मनोरंजन की आवाज माने जाते हैं। इन्सा न की जिन्दफगी में संगीत खुशी के लिए ही हो, इस बात को गहरी आध्यानत्मिकता के साथ मानने वाले दलेर सूफी गायन और गुरबानी के उतने ही विनम्र और गहरे डूबे हुए साधक हैं जिनकी दुनिया दीवानी है।